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Friday, December 3, 2010

जाने कब

कब ये सुबह होगी,कब ये सुबह होगी;
मंजिल सामने है,न जाने कब सुबह होगी;
रात बीत गयी,शाम  ये ढल गई;
फिर भी न जाने कब ये सुबह होगी;
खाए जा रहा है ये तिम;
दिखाई दे रहा न प्रतिबिंब;
न जाने,जाने कब ये सुबह होगी;
उठ चुके है लोग,जा चुके है लोग;
न जाने कब मेरे जीवन की सुबह होगी;
सुबह भी होगी तो  न जाने कैसी होगी;
अच्छी होगी या बुरी होगी;
जाने न कब ये सुबह होगी;
नई सुबह होगी ...............................

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